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संभल से बड़ी राजनीति खबर आ रही है। समाजवादी पार्टी के सांसदों और नेताओं द्वारा बरेली जाने के प्रयास को प्रशासन ने रोक दिया है। सपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें बीती रात से ही हाउस अरेस्ट कर रखा गया है और उन्हें बरेली जाकर स्थितियों की सत्यता सामने रखने से रोका जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनज़र उठाया गया।
बरेली में हालिया घटनाओं के बाद सपा का 14 सदस्यों वाला प्रतिनिधिमंडल आज (4 अक्टूबर 2025) बरेली जा रहा था, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने निर्देश दिए कि बिना अनुमति कोई भी राजनीतिक प्रतिनिधि बरेली सीमा में प्रवेश न करे। इसी कार्रवाई के क्रम में संभल में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई तथा कुछ अन्य नेताओं का आवागमन भी रोका गया। प्रशासन ने बताया कि प्रतिनिधि मंडल के जाने से माहौल बिगड़ सकता है, इसलिए रोकनी पड़ी।
बरेली की घटनाओं के सिलसिले में पुलिस ने अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया है — रिपोर्टों में कहा गया है कि 81 लोगों तक को गिरफ्तार किया गया है। प्रशासन ने स्थानीय संवेदनशीलता का हवाला देते हुए राजनीतिक प्रतिनिधियों के वहां प्रवेश पर पाबंदी लगाई।
“लोकतंत्र में यह नहीं लिखा है कि किसी को कहीं पर भी जाने से रोका जाए… यह शासन प्रशासन तानाशाही रवैया अपना रहा है।”
— सांसद
“हमें बीती रात्रि 2:00 बजे से ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया है और हमें बरेली नहीं जाने दिया जा रहा है।” — सांसद
“हम वहां दंगा भड़काने नहीं जा रहे हैं — हमारा मकसद है वहां के लोगों से मिलना, उनकी प्रताड़ना का हाल-चाल जानना और रिपोर्ट बनाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपना।” — सांसद
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि का अचानक आने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए रोक लगाई गई। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक था। (प्रशासन की आधिकारिक टिप्पणियों के लिए संबंधित जिलाधिकारी/पुलिस प्रवक्ता से पुष्टि रिपोर्ट अभी जारी हो सकती है)।
स्थिति का प्रभाव
इस रोक-टोक और नेताओं के हाउस अरेस्ट के आरोप ने राजनीतिक गर्माहट बढ़ा दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतंत्र में आवाज दबाने की यह कोशिश है, जबकि सरकार/प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है। बरेली में हुई हिंसा और उसके बाद की कार्रवाई—गिरफ्तारियां और संबंधित प्रवर्तन — ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है।