मऊरानीपुर……श्री शांति निकेतन धनुषधारी आश्रम में महंत श्री रामदास ब्रह्मचारी जी (बुंदेलखंड पीठाधीश्वर) के सानिध्य में चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्री शत चंडी महायज्ञ के द्वितीय दिवस में ब्रह्म मुहूर्त में वेद पाठ प्रारंभ हुआ l प्रातः काल श्री हनुमान जी का लांगगूल प्रयोग करके हनुमान जी को सवामन वेसन के लड्डुओं का भोग लगाया गया एवं वैदिक विद्वानों द्वारा पंडितों का कार्य विभाजन करके यजमानों को कुण्ड वितरित किए गए l सभी देवताओं का आवाहन करके मंडप प्रवेश किया गया, कल अरणी मंथन करके अग्नि देव का प्राक्रट करके अग्नि स्थापन के साथ हवन प्रारंभ होगा l

मध्यान में श्रीमद् भागवत कथा प्रारंभ करते हुए भागवत आचार्य पंडित श्री बृजेश त्रिपाठी शास्त्री जी ने बताया कि श्री वेदव्यास जी ने भागवत में परम सत्य की वंदना की है वह परम सत्य भगवान श्री कृष्ण है l शास्त्री जी ने बताया श्रीमद् भागवत वेदों का रस से भरा हुआ परिपक्य फल है और इसमें अमृत रूपी रस भरा हुआ है, इसलिए इसकी कथा को मोक्ष पर्यंत सदैव सुनते रहना चाहिए क्योंकि भगवान की कथा केवल मृत्यु लोक पर ही सुलभ है स्वर्ग सत्य लोकों मैं भी भगवान की कथा प्राप्त नहीं होती l श्रीमद् भागवत महापुराण का मूल पाठ काशी से पधारे पंडित विपिन बिहारी मिश्रा द्वारा किया जा रहा है l भागवत भगवान की आरती भागवत परीक्षित अर्चना अरविंद अड़जरिया ने की l
सायंकाल में श्री श्री 1008 श्री जगतगुरु कामदगिरी पीठाधीश्वर परम पूज्य राम स्वरूपाचार्य जी के द्वारा राम कथा मंदाकिनी में श्रोताओं कों बताया कि शिव सती प्रसंग एक बार त्रेता जुग माहीं। संभु गए कुंभज रिषि पाहीं॥
संग सती जगजननि भवानी। पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी॥सती ने भगवान शंकर की बात को ना मान करके मन में संशय ले करके कथा पंडाल में कथा सुनने गई सती का अस्तित्व हीन होना पड़ा जो व्यक्ति कथा पंडाल में संशय लेकर के आता है या जिसके जीवन में संशय आ जाता है तो उसे व्यक्ति का अस्तित्व नष्ट हो जाता है निश्चित है इसलिए कथा पंडाल में हमेशा श्रद्धा भावना से आना चाहिए और श्रद्धा से कथा श्रवण करना चाहिए l

इस कार्यक्रम में रामभरोसें शास्त्री, भगवत नारायण तिवारी( ब्रह्मा ),अखिलेश शास्त्री (शतचंडी यज्ञ आचार्य),चुन्नी लाल गुप्ता प्रयागराज, शत्रुघन सिंह गौतम प्रयागराज, राजकिशोर तिवारी मुडहरा, शशि भूषण सिंह गौतम बाँदा, राजेन्द्र सिंह मंडी बमौरा, सुरेश कुमार स्वर्णकार मऊ, राजेन्द्र कुमार अग्रवाल साई खेडा, शैलेन्द्र त्रिपाठी पप्पू, रवेन्द्र दीक्षित मऊ, पंकज तिवारी बिजरवारा , बृजेन्द्र त्रिपाठी, बबली सिंह, रामनरेश तिवारी, बलराम सुल्लेरे,महेश मिश्रा, योगेंद्र तिवारी, रितेश सुल्लेरे, बद्री पाठक,जितेंद्र तिवारी, सतीश मिश्रा, राजेंद्र तिवारी( दुर्गापुर), सत्यव्रत द्विवेदी, विनोद दुबे, अंकित दुवे, प्रमोद तिवारी, महेश मिश्रा, देवांश पुरोहित, सुधीर पुरोहित,दीपक तिवारी, हिमांशु मिश्रा, रामबाबू ओझा ( यजुर्वेद),दीपू मिश्रा( ऋग्वेद), रवि तिवारी( सामवेद ), मनीष दीक्षित( अर्थवेद ),रामजीवन पस्तोर ( भागवताचार्य ) विद्वानों के साथ गदाधर त्रिपाठी, प्रदीप पाठक,बबलू

भारद्वाज, अखिलेश सेठ, आशु भारद्वाज,आशीष कौशिक, मनीष खेवरिया, दीनदयाल साहू,राजेश बिलाटिया,कृष्ण गोपाल बबेले, अनंतराम सर्राफ, पप्पू साहू, संतोष शर्मा, जज्जू रावत, विनय ताम्रकार,रामलोचन, अरविन्द राय, कैलाश दीक्षित,राम मनोहर तिवारी, मनोज मिश्रा,लाल जी तिवारी, संजय ताम्रकार, गोपाल ताम्रकार, प्रमोद चतुर्वेदी, बैजनाथ तिवारी,महेंद्र सिंह, अंबादत्त तिवारी,दिवाकर पाण्डेय, राजेंद्र पाण्डेय, गुड्डू तिवारी,पिंकी वर्मा, राकेश राय, स्वामी राय,हरि ओम श्रीधर,मुन्नालाल दुबे,ओम प्रकाश शर्मा, सुरेश सोनी, संतोष तिवारी,अभिषेक नायक, मृदुल मोर,दिनेश राजपूत,सोमेश त्रिपाठी,महेश सैन,रामगुलाम सोनी, सुशील पुरवार, रोहित महाराज, संतोष चौवे, मृदुल मोर, शिव प्रतापसिंह, अमित पुरवार, रामलखन दुबे ,बाॅबी अग्रवाल, जयप्रकाश खरे, सुनीता साहू,किरन, मालती,बिमला, रेखा, सुमन,सेजल, दिया, खुशी,जागृति, रामकली,राम मूर्ति,पार्वती, शोभा, राम श्री, सुमन,भावना,रानी, ममता सहित बडी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे….