रिपोर्ट-दुष्यंत उपाध्याय

आगरा नदी त्रासदी – पांच युवकों की मौत, सात अब भी लापता
आगरा/खेरागढ़।
आगरा जनपद के खेरागढ़ क्षेत्र में उटंगन नदी में देवी प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुआ हादसा अब एक भयावह त्रासदी में बदल चुका है। इस हादसे में पांच युवकों की मौत हो चुकी है, जबकि सात युवक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासनिक अमला लगातार रेस्क्यू अभियान में जुटा हुआ है, लेकिन हर बीतते घंटे के साथ उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला दर्दनाक सच
पांचों मृतकों के शवों को आगरा के एस.एन. मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम हाउस लाया गया, जहां चिकित्सकों की दो टीमों ने देर रात तक जांच की।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि मृतकों के फेफड़ों में झाग, सांस की नली और गले में कीचड़, तथा पेट में पानी भरा हुआ पाया गया।
इससे स्पष्ट है कि युवकों की मौत दम घुटने और ऑक्सीजन की कमी से हुई।
घंटों पानी में डूबे रहने से शव अकड़ चुके थे और त्वचा का रंग सफेद पड़ गया था।
चिकित्सकों के अनुसार, यह दर्शाता है कि शव लंबे समय तक नदी के भीतर कीचड़ में दबे रहे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को शासन को भेज दिया गया है।
मौत का मंजर: सायरनों के बीच गूंजती सिसकियां
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर माहौल बेहद गमगीन था।
जैसे ही एंबुलेंस का सायरन गूंजता, परिजन शव की एक झलक पाने के लिए दौड़ पड़ते।
किसी की आंखों में बेटे की तस्वीर थी, तो किसी के हाथों में भाई का कपड़ा।
सिसकियों और चीखों से पूरा परिसर गूंज उठा।
पड़ोसी और रिश्तेदार सांत्वना देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हर चेहरा सिर्फ़ दर्द और अविश्वास से भरा था।
घटना के बाद से ही प्रशासन ने नदी किनारे सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
भारी दलदल और गहराई के कारण रेस्क्यू में कठिनाइयाँ आ रही हैं।
एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीमें नदी को आंशिक रूप से सुखाने का प्रयास कर रही हैं,
ताकि लापता सात युवकों को खोजा जा सके।
संभावना जताई जा रही है कि कुछ युवक नदी के भीतर कीचड़ या दलदल में फंसे हो सकते हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी शासन को भेज दी गई है और उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी हुए हैं।
प्रशासन ने जलाशयों और नदियों में बिना सुरक्षा इंतज़ाम के विसर्जन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही स्थानीय स्तर पर सुरक्षा चक्र बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
देवी प्रतिमा विसर्जन के समय श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी।
इसी दौरान कुछ युवक नदी में गहराई तक उतर गए और अचानक धारा तेज़ हो जाने से सभी बह गए।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि धार्मिक उत्सवों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी ज़रूरी है।
श्रद्धा का जोश जब सावधानी के बिना होता है, तो कई बार इस तरह की त्रासदी बन जाता है।
उटंगन नदी के इस हादसे ने कई परिवारों से उनके लाल छीन लिए।
मां की आंखें बेटे की राह देख रही हैं, पिता अब भी नदी किनारे उम्मीद लगाए बैठे हैं।
सात युवकों की तलाश अब भी जारी है,
लेकिन उनके घरों में सन्नाटा और आसमान में मातम छाया हुआ है।